नव वर्ष की इस भोर में ,
चारों ओर से से उठते ,
कोलाहल और शोर में ,
कुछ आशा ,कुछ संशय में ,
कभी साहस ,कभी भय से
विनीत विनम्र भाव से ,
तुम्हारे लिए विनती करती हूँ
ईश्वर नवजीवन का वरदान दे ,
बन्धनों को तोड़,
उन्मुक्त रहो,
भयमुक्त रहो ,
अंधेरों से लड़ते हुए ,
आशाओं से संयुक्त रहो।
कठिनायियो से लड़ते हुए ,
तुम सदा सबला बनो ,
निर्झर नीर सी निर्मला बनो ,
और सदा निर्भया रहो।
चारों ओर से से उठते ,
कोलाहल और शोर में ,
कुछ आशा ,कुछ संशय में ,
कभी साहस ,कभी भय से
विनीत विनम्र भाव से ,
तुम्हारे लिए विनती करती हूँ
ईश्वर नवजीवन का वरदान दे ,
बन्धनों को तोड़,
उन्मुक्त रहो,
भयमुक्त रहो ,
अंधेरों से लड़ते हुए ,
आशाओं से संयुक्त रहो।
कठिनायियो से लड़ते हुए ,
तुम सदा सबला बनो ,
निर्झर नीर सी निर्मला बनो ,
और सदा निर्भया रहो।
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